Thursday, November 17, 2016

साहसी लोग

जीवन में साहस वाले लोग ही कुछ असाधारण कर दिखाते हैं। हजारों मील तक फैले देश पर उनका ही  सिक्का जमता है। विश्व इतिहास में उनका ही नाम अमर होता है। साहसी व्यक्ति की चाहे कोई कितनी भी आलोचना करे, उसे अपने नेतृत्व के बारे में संदेह नहीं होता है। उसकी प्रतिज्ञा भागीरथ की प्रतिज्ञा होती है। उसका हठ हमीर का हठ होता है। वे झिझकते नहीं, साहस नहीं गंवाते, अपने जीवन के विकास में आयी प्रत्येक बाधा को वह आंतरिक हो या बाह्य उखाड़ फेंकते हैं। वे कभी विचलित नहीं होते धीरे-धीरे उनकी शक्ति विराट् शक्ति का रूप धारण करती जाती है। उन्हें अपने निर्णय के ऊपर कभी संशय नहीं होता।
     कठिन समय आए, सनसनीखेज घटनाएं हों जाएं, पूंजी समाप्त हो जाए, लोग निरूत्साहित करें, संगी साथी छोड़ जाएं, कुछ भी हो जाए, वे आत्मविश्वास में कभी क्मी नहीं आने देते। अपने भविष्य पर एकमात्र दृष्टि जमाए वे आगे बढ़ते जाते हैं।
उनकाआत्म विश्वास का पल्ला पकड़ते ही उनका अधिकार क्षेत्र असीमित हो जाता है व वे जितनी धन राशि चाहें लोग उनको देते हैं व खुशी से देते हैं।
इसलिए अटूट साहस का लेकर कोई भी लक्ष्य पथ पर अग्रसर हो सकता है।
साहस ही वह शस्त्र है जिससे सभी संकट कट जाते हैं। उद्देश्य पर मर मिटने की कसम खाने वाले सदा ही विजयी हुए हैं। शिक्षा संबंधी योग्यता, प्रभावशाली सिफारिश, ऊंचे वंश में जन्म, सौभाग्यशाली नक्षत्र में जन्म कुछ भी काम नहीं आता अगर आपमें साहस नहीं है।

Wednesday, November 9, 2016

ईश्वर

क्या वाकई इस धरती पर ईश्वर का अस्तित्व हैं .......?
अब अगर मैं किसी ऐसी चीज़ के बारे में बात करूँ जो आपके वर्तमान अनुभव में नहीं है, तो आप उसे नहीं समझ पाएंगे। मान लीजिए, आपने कभी सूर्य की रोशनी नहीं देखी और इसे देखने के लिए आपके पास आंखें भी नहीं हैं। ऐसे में अगर मैं इसके बारे में बात करूं, तो चाहे मैं इसकी व्याख्या कितने ही तरीके से कर डालूं, आप समझ नहीं पाएंगे कि सूर्य की रोशनी होती क्या है। इसलिए कोई भी ऐसी चीज़ जो आपके वर्तमान अनुभव में नहीं है, उसे नहीं समझा जा सकता। इसलिए इसके बाद जो एकमात्र संभावना रह जाती है, वह है कि आपको मुझ पर विश्वास करना होगा। मैं कह रहा हूँ, वही आपको मान लेना होगा। अब अगर आप मुझ पर विश्वास करते हैं, तो यह किसी भी तरह से आपको कहीं भी नहीं पहुंचाएगा। अगर आप मुझ पर विश्वास नहीं करते हैं, तब भी आप कहीं नहीं पहुँच पाएंगे। मै आपको एक कहानी सुनाता हूं।
एक दिन, सुबह-सुबह, गौतम बुद्ध अपने शिष्यों की सभा में बैठे हुए थे। सूरज निकला नहीं था, अभी भी अँधेरा था। वहां एक आदमी आया। वह राम का बहुत बड़ा भक्त था। उसने अपना पूरा जीवन ”राम, राम, राम” कहने में ही बिताया था। इसके अलावा उसने अपने पूरे जीवन में और कुछ भी नहीं कहा था। यहां तक कि उसके कपड़ों पर भी हर जगह ”राम, राम” लिखा था। वह केवल मंदिरों में ही नहीं जाता था, बल्कि उसने कई मंदिर भी बनवाए थे। अब वह बूढ़ा हो रहा था और उसे एक छोटा सा संदेह हो गया। ”मैं जीवन भर ‘राम, राम’ कहता रहा, लेकिन वे लोग जिन्होंने कभी ईश्वर में विश्वास नहीं किया, उनके लिए भी सूरज उगता है। उनकी सांसें भी चलती हैं। वे भी आनंदित हैं एवं उनके जीवन में भी खुशियों के कई मौके आए हैं। मैं बैठकर बस ‘राम, राम’ कहता रहा। मान लो, जैसे कि वे कहते हैं, कि कोई ईश्वर नहीं है, तब तो मेरा पूरा जीवन बेकार चला गया।”
वह जानता था कि ईश्वर है लेकिन उसे एक छोटा सा संदेह हो गया, बस इतना ही था। ”एक अलौकिक आदमी यहां मौजूद है, उससे बात कर मुझे अपना संदेह दूर कर लेना चाहिए।” लेकिन सबके सामने यह प्रश्न कैसे पूछा जाए? इसलिए वह सूर्योदय से पहले आया, जबकि अंधेरा अभी पूरी तरह से छंटा नहीं था। एक कोने में खड़े होकर उसने बुद्ध से प्रश्न किया, ‘क्या ईश्वर है या नहीं?” गौतम बुद्ध ने उसे देखा और कहा, ‘नहीं’। शिष्यों के बीच से ‘उफ्फ ’ की आवाज़ निकली, उन्होंने राहत भरी सांस ली। ईश्वर है या नहीं, यह द्वंद् उनमें प्रतिदिन चलता रहता था। उन्होंने कई बार गौतम से यह प्रश्न किया था और जब भी यह प्रश्न किया जाता था, गौतम चुप रह जाते थे। यह पहला मौका था, जब उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, ‘नहीं’।
ईश्वर के बिना रहना कितना आनंददायक था। शष्यों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। वह दिन सबके लिए एक खुशी का दिन था। शाम को, फिर बुद्ध अपने शिष्यों के बीच बैठे हुए थे, उसी समय एक दूसरा आदमी आया। वह एक ‘चार्वाक’ था। क्या आप जानते हैं कि चार्वाक कौन होता है? उन दिनों एक समूह हुआ करता था, जिन्हें चार्वाक कहा जाता था। वे पूरे भौतिकवादी लोग होते थे। वे किसी चीज़ में विश्वास नहीं करते। वे केवल उसी में विश्वास करते थे, जिसे वे देख सकते थे। इसके अलावा, उनके लिए किसी और किसी चीज़ का अस्तित्व नहीं होता।
अब वह बूढ़ा हो रहा था और उसके मन में एक छोटा सा संदेह आ गया। “मैं पूरे जीवन लोगों को कहता रहा कि ईश्वर नहीं है। मान लो अगर ईश्वर है तो जब मैं वहां जाऊंगा तो क्या वह मुझे छोड़ेगा? लोगों से वह नरक के बारे में कई बार सुन चुका था। अब उसे थोड़ी सी शंका हो गई। वह जानता है कि ईश्वर नहीं है, वह अपना पूरा जीवन यही साबित करता रहा, लेकिन उसे थोड़ा सा संदेह हो गया। ‘मान लो अगर ईश्वर है? तो संकट क्यों मोल लिया जाए? शहर में एक अलौकिक पुरुष है। उनसे जऱा मैं पूछ ही लूँ।” इसलिए देर शाम को, अंधेरा होने के बाद वह गौतम के पास पहुंचा और उसने गौतम से पूछा, “क्या ईश्वर है?” गौतम ने उसे देखा और कहा, ”हां”। एक बार फिर शिष्यों के बीच बड़ा संघर्ष शुरू हो गया। सुबह से वे बहुत खुश थे, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ईश्वर नहीं है, लेकिन शाम को वह कह रहे हैं कि ईश्वर है। ऐसा क्यों है?
अगर आप यह स्वीकार नहीं कर पाते कि, ‘मैं नहीं जानता हूँ’, तो आपने अपने जीवन में जानने की सभी संभावनाओं को नष्ट कर दिया है। अगर आप वाकई जानना चाहते हैं तो आपको अपने भीतर मुडऩा होगा, अपनी आंतरिक प्रकृति से जुडऩा होगा।
देखिए, अगर आप मुझ पर विश्वास करते हैं, तो आप स्वयं को मूर्ख बना रहे हैं। बिना जाने आप केवल जानने का बहाना करेंगे। अगर आप मुझ पर अविश्वास करते हैं, तो आप जानने की उस संभावना को नष्ट कर देंगे जो आपके अनुभव में नहीं है। आप ईश्वर को जानते हैं, आप जानते हैं कि वह कहाँ रहता है, आप उसका नाम जानते हैं, आप जानते हैं कि उसकी पत्नी कौन है, आप जानते हैं कि उसके बच्चे कितने हैं, आप उसका जन्मदिन जानते हैं, आप जानते हैं कि वह अपने जन्मदिन पर कौन सी मिठाई पसंद करता है। आप सब कुछ जानते हैं, लेकिन आप यह नहीं जानते कि आपके भीतर क्या हो रहा है। दरअसल, यही सारी समस्या है। आप स्वर्ग का पता भी जानते हैं, लेकिन आपको इसका कोई बोध नहीं है कि इस क्षण आपके भीतर क्या हो रहा है।
जो आपके अनुभव में है उसे आप जानते हैं। जो आपके अनुभव में नहीं है, आपको यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि उसका अस्तित्व नहीं है। बस इतना कहिए कि, “मैं ईश्वर को नहीं जानता”। अगर आप इस अवस्था में पहुंच गए हैं, तो विकास अपने आप हो जाएगा। सभी लोग उस बारे में बहस किए जा रहे हैं जिसे वे मूलत: नहीं जानते, क्योंकि कहीं-न-कहीं उन्होंने यह गुण खो दिया है जिससे कि वे पूरी ईमानदारीपूर्वक स्वीकार कर पाएं कि, ‘मैं ईश्वर को नहीं जानता’। अगर आप यह स्वीकार नहीं कर पाते कि, ‘मैं ईश्वर को नहीं जानता हूँ’, तो आपने अपने जीवन में जानने की सभी संभावनाओं को नष्ट कर दिया है। अगर आप वाकई जानना चाहते हैं तो आपको अपने भीतर मुडऩा होगा, अपनी आंतरिक प्रकृति से जुडऩा होगा।

Friday, October 28, 2016

इंसान

इंसान चार कमरो का मकान है जिसमे चार तल है

शारीरिक तल
भावात्मक तल
मानसिक तल
आध्यात्मिक तल

इसलिए जब भी किसी पार्टनर की तलाश करता है तो इन चारो तलो पर करता है

शारीरिक तल पर स्वस्थ
भावात्मक तल पर केयर और स्नेह
मानसिक तल पर समझ
और आध्यात्मिक तल पर स्वतंत्रता में सहयोगी

और अगर इन चारो तलो पर कोई पार्टनर मेल जाए तो निश्चित ही उसका जीवन स्वर्ग है

और यदि ऐसा न हो तो वही होगा जो आप ज्यादातर संबंधो में देखते है ...!!

अकसर कोई सुन्दर होता है तो वो अपनी सुंदरता को ही सब कुछ मान बैठता है
कोई भावात्मक रूप से अच्छा है तो वो अपने भाव के आधार पर ही सब पाना चाहता है और भूल ही जाता है कि शरीर का फिट होना भी ज़रूरी है
लेकिन इंसान को चहिये कि चारो तलो पर अपने को फिट रखे तभी जीवन को वास्तविक रूप से भोगा जा सकता है ...

Wednesday, October 26, 2016

शायरी

       "ठोकरें खाता हूँ पर
         शान" से चलता हूँ"
                "मैं खुले आसमान के नीचे
                 सीना तान के चलता हूँ"

         "मुश्किलें तो सच है जिंदगी का
           आने दो- आने दो
         "उठूंगा, गिरूंगा फिर उठूंगा और
   आखिर में "जीतूंगा मैं" यह ठान के चलता हूँ"

Monday, October 24, 2016

सुविचार

_*गीता में साफ़ शब्दो मे लिखा है..*_
_*निराश मत होना..*_
_*कमजोर तेरा वक्त है..*_
_*तू नही........*_
_*ये संसार "जरूरत" के नियम पर चलता है....*_
_*सर्दियो में जिस "सूरज"*_
_*का इंतजार होता है,*_
_*उसी "सूरज" का गर्मियों में*_
_*तिरस्कार भी होता है.....*_
_*आप की कीमत तब तक होगी जब तक आपकी जरुरत है...!*_
*"तालाब एक ही है..,*
*उसी तालाब मे हंस मोती चुनता है और बगुला मछली...!*
*सोच सोच का फर्क होता है...!*
*आपकी सोच ही आपको बड़ा बनाती है...!!*
*यदि हम गुलाब की तरह खिलना*
*चाहते हो तो  काँटों के साथ*
*तालमेल की कला सीखनी होगी*...
           
               ☀

*🌹हँसते रहिये हंसाते रहिये🌹*
        *🌹सदा मुस्कुराते रहिये🌹*
                    *🐚☀🐚*
                *🐾स्नेह वंदन🐾*

जिंदगी

प्यास लगी थी गजब की...
मगर पानी मे जहर था...


पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.




बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!



वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!



सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।।
आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।




"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!



"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,

पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"..
अजीब सौदागर है ये वक़्त भी!!!!
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया....

अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा. ......




लौट आता हूँ वापस घर की तरफ... हर रोज़ थका-हारा,
आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ।

“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे...!!”


भरी जेब ने ' दुनिया ' की पहेचान करवाई और खाली जेब ने ' अपनो ' की.

जब लगे पैसा कमाने, तो समझ आया,
शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,
अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है। ...!!!

हंसने की इच्छा ना हो...
तो भी हसना पड़ता है...
.
कोई जब पूछे कैसे हो...??
तो मजे में हूँ कहना पड़ता है...
.

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों....
यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है.

"माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती...
यहाँ आदमी आदमी से जलता है...!!"

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट,
ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,

पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा
कि जीवन में मंगल है या नहीं।

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि...

पत्थरों को मनाने में ,
फूलों का क़त्ल कर आए हम

गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ....
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम ।।

अगर दिल को छु जाये तो कमेन्ट जरूर करें

पैसा

वाह रे पैसा , तेरे कितने नाम !!!

मंदिर मे दिया जाये तो ( चढ़ावा ) ..,

स्कुल में ( फ़ीस ) ..

शादी में दो तो ( दहेज ) ..,

तलाक देने पर ( गुजारा भत्ता ) ..,

आप किसी को देते हो तो ( कर्ज ) ..,

अदालत में ( जुर्माना )..,.

सरकार लेती है तो ( कर ) ..,

सेवानिवृत्त होने पे ( पेंशन ) ..,

अपहर्ताओ के लिएं ( फिरौती ) ..,

होटल में सेवा के लिए ( टिप ) ..,.

बैंक से उधार लो तो ( ऋण ) ..,

श्रमिकों के लिए ( वेतन ) ..,

मातहत कर्मियों के लिए ( मजदूरी ) ..,

अवैध रूप से प्राप्त सेवा ( रिश्वत ) ..,

और मुझे दोगे तो ( 😄👌गिफ्ट

😍😋😋👌)

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈

मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते; मगर जीते जी मैं आपको बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ।

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈

मुझे पसंद करो सिर्फ इस हद तक कि लोग आपको नापसन्द न करने लगें।

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈
मैं भगवान् नहीं मगर लोग मुझे भगवान् से कम नहीं मानते।

👉  *मैं पैसा हूँ:!*👈

मैं नमक की तरह हूँ; जो जरुरी तो है मगर जरुरतसे ज्यादा हो तो जिंदगी का स्वाद बिगाड़ देता है।

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈

इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे जिनके पास मैं बेशुमार था; मगर फिरभी वो मरे और उनके लिए रोने वाला कोई नहीं था।

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈

मैं कुछ भी नहीं हूँ; मगर मैं निर्धारित करता हूँ; कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है।

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈

मैं आपके पास हूँ तो आपका हूँ:! आपके पास नहीं हूँ तो; आपका नहीं हूँ:! मगर मैं आपके पास हूँ तो सब आपके हैं।

👉  *मैं पैसा हूँ:!* 👈

मैं नई नई रिश्तेदारियाँ बनाता हूँ; मगर असली औऱ पुरानी बिगाड़ देता हूँ।

👉  *मैं पैसा हूँ:!*👈

मैं सारे फसाद की जड़ हूँ; मगर फिर भी न जाने क्यों सब मेरे पीछे इतना पागल हैं:?।

🙏*विचार कीजिए* 🙏