*ख्वाहिशों* से नहीं गिरते हैं,
फूल झोली में,
*कर्म* की शाख को हिलाना होगा।
कुछ नहीं होगा
कोसने से *अँधेरे* को,
अपने हिस्से का *दीया* खुद ही
जलाना होगा ।
Everything Begings From Shoonya And Ends in A Shoonya
*ख्वाहिशों* से नहीं गिरते हैं,
फूल झोली में,
*कर्म* की शाख को हिलाना होगा।
कुछ नहीं होगा
कोसने से *अँधेरे* को,
अपने हिस्से का *दीया* खुद ही
जलाना होगा ।
कभी संभले तो कभी बिखरते नज़र आये हम...
ज़िंदगी के हर मोड़ पर ख़ुद में सिमटते आये हम...
यू तो ज़माना कभी ख़रीद ही नहीं सकता मुझे...
मगर प्यार के दो लफजो से सदा बिकते आये