Thursday, April 23, 2009
नसीहत
के दूर जाना खौफ़ बन जाये
एक कदम पीछे देखने पर
सीधा रास्ता भी खाई नज़र आये
किसी को इतना अपना न बना
कि उसे खोने का डर लगा रहे
इसी डर के बीच एक दिन ऐसा न आये
तु पल पल खुद को ही खोने लगे
किसी के इतने सपने न देख
के काली रात भी रन्गीली लगे
आन्ख खुले तो बर्दाश्त न हो
जब सपना टूट टूट कर बिखरने लगे
किसी को इतना प्यार न कर
के बैठे बैठे आन्ख नम हो जाये
उसे गर मिले एक दर्द
इधर जिन्दगी के दो पल कम हो जाये
किसी के बारे मे इतना न सोच
कि सोच का मतलब ही वो बन जाये
भीड के बीच भी
लगे तन्हाई से जकडे गये
किसी को इतना याद न कर
कि जहा देखो वोही नज़र आये
राह देख देख कर कही ऐसा न हो
जिन्दगी पीछे छूट जाये
Wednesday, December 3, 2008
दोस्ती
जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..
यह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..
नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी॥पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..
कौन कहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी॥दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..
सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग॥दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..
माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये "अभी"पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..
ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते हैं, दोस्ती में..
Friday, August 22, 2008
कुछ चुटकुले
उ. सुरूर
बताओ कैसे ?
बिलकुल आसन है ....
तेरा * तेरा * तेरा = सुरूर
2) इक आदमी के 6 अंगुलियाँ थी,उसे लोग हनुमान बुलाते थे ..बताओ क्यों?
.....................क्योंकि उसका नाम हनुमान था..
3) भारत की पहली महिला जिसने हवाई विदेश यात्रा की ??
..........सीता , रावण के साथ !
4) कंगारू क्या बोला जब उसका बच्चा उसे नही मिला ??
…….आईला !!!!! किसने मेरा पॉकेट मार लिया !!!
5)इक हाथी को चींटी से प्यार हो गया पर चींटी के घरवाले राजी नहीं , बताओ क्यों ? ??
......…**लड़के का दांत बाहर है**
6 ) Full form of MATHS????
Mentally Affected Teacher Harassing Students…
8) उस लड़की को क्या कहोगे जो हंसती नहीं हो ??
उत्तर : हसी-ना
Tuesday, July 22, 2008
त्राहिमाम ! त्राहिमाम ! त्राहिमाम !
महान कवि हरिवंश राय बच्चन जी की कविता की पंक्तियाँ हैं ये महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है,अश्रु, श्वेद, रक्त सेलथ पथ, लथ पथ, लथ पथअग्निपथ ! अग्निपथ ! अग्निपथ!.किन्तु आज के संदर्भ मे एस कविता को इस प्रकार लिखना होगा ..... ........अरे ,रुको जरा देखो यह कैसा वीभत्स द्रश्य है,मर रहा मनुष्य हैं .अश्रु, श्वेद, रक्त सेलथ पथ, लथ पथ, लथ पथअग्निपथ ! अग्निपथ ! अग्निपथ !......रेलपथ !रेलपथ !आदमी की दिव्य देह ,दे रही दुर्गन्ध राजनिति की वासना ,ले रही आनंद .....कुत्ते चील भी करने लगे उल्टियाथम गई ,गड़ गई ...............दौड़ती रेल गाडियाँ मर नही सकता कोई भी देश फिर से चल पड़ेगा ...इसी उम्मीद पर तो कल टिका हैं जाति के कब टूटेंगे बन्धन ...सिर्फ एक सपना हैं जातियों के घ्रणित चक्रव्यूह मे फँसाकर देश को,हंस रहें है ..राजनिति के खूनी भेडिये...शायद सो रहें हैं भगवान भी ,त्राहिमाम ! त्राहिमाम! त्राहिमाम! .
Sunday, July 20, 2008
मेरी चाहत
Friday, July 18, 2008
सफलता का राज
कोशिश तो सबको करनी चाहिए!!According To A सफल आदमी !!कहने को मैं कह सकता हूँ कि सफलता-असफलता कुछ नहीं होती। लेकिन मैं जानता हूँ कि सफलता-असफलता दुनियावी लिहाज़ से बहुत मायने रखती है।सफल आदमी को दुनिया मानती है और असफल आदमी को वह स्वीकार नहीं करती।यह ठीक है कि कोशिश करते रहने से आख़िर सफलता मिल ही जाती है और असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए। लेकिन यह भी कम बड़ा सच नहीं है कि कई बार सफलता इतनी देर से मिलती है कि आदमी टूट जाता है। हताश हो जाता है और अपने आपको तबाह कर लेता है।ठीक उसी तरह यह भी सच है कि कई बार जीवन में सफलता इतनी जल्दी मिल जाती है कि उसे संभालना मुश्किल होता है।मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा क्योंकि मेरे कंधे पर सफलता थी और पीछे मुड़कर देखने की ज़रुरत ही नहीं थी. आज मुझे भी अच्छा लगता है कि मैं पीछे मुड़कर नहीं देखतामैं आज जो कुछ भी कर पा रहा हूँ, यह कहने में हिचक नहीं कि उसके पीछे मुझे मिली सफलता है. अगर मुझे अपने शुरुआती दिनों में इतनी सफलता न मिली होती तो नहीं मालूम कि मैं इतनी ही शिद्दत से और इतनी मुद्दत तक काम कर भी पाता.आज लोग कहते हैं कि ...... ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
Wednesday, July 16, 2008
फॅमिली प्रॉब्लम
एक ने कहा...." यार.... बहुत फेमिली प्रॉब्लम है "
दूसरा व्यक्ति : तु पहले मेरी सुन........
मैंने एक विधवा महिला से शादी की जिसके एक लड़की थी ...
कुछ दिनों बाद पता चला कि मेरे पिताजी को उस विधवा महिला कि पुत्री से प्यार है ....
और उन्होने इस तरह मेरी ही लड़की से शादी कर ली ...
अब मेरे पिताजी मेरे दामाद बन गए और मेरी बेटी मेरी माँ बन गयी....
और मेरी ही पत्नी मेरी नानी हो गयी !!
ज्यादा प्रॉब्लम तब हुई जब जब मेरे लड़का हुआ ॥
अब मेरा लड़का मेरी माँ का भाई हो गया तो इस तरह मेरा मामा हो गया .......
परिस्थिति तो तब ख़राब हुई जब मेरे पिताजी को लड़का हुआ ....
मेरे पिताजी का लड़का यानी मेरा भाई मेरा ही नवासा( दोहिता ) हो गया और इस तरह मैं स्वयम का ही दादा हो गया और स्वयम का ही पोता बन गया ............"
और तू कहता है कि तुझे फेमिली प्रॉब्लम है ...."
